योग परिचय (Yoga Introduction)
योग परिचय (Yoga Introduction)
योग आध्यात्मिक अनुशासन एवं अत्यं सूक्ष्म विज्ञान पर आधारित ज्ञान है जो मन और शरीर के बीच सामंजस्य स्थापित करता है। यह स्वस्थ जीवन की कला एवं विज्ञान है।
योग शब्द का अर्थ:
संस्कृत वाङ्मय के अनुसार योग शब्द युज् धातु में घञ् प्रत्यय लगने से निष्पन्न अर्थात बना है। पाणिनीय व्याकरण के अनुसार यह तीन अर्थों में प्रयुक्त होता है।
(1) – युज् समाधि
(2) – युजिर योगे = जोड़
(3) – युज् संयमने = सामंजस्य
इस प्रकार योग का अर्थ 'एकता' या 'बांधना' है।
यौगिक ग्रंथों के अनुसार, योग अभ्यास व्यक्तिगत चेतना को सार्वभौमिक चेतना के साथ एकाकार कर देता है । आधुनिक वैज्ञानिकों के अनुसार ब्रह्मांड में जो कुछ भी है वह परमाणु का प्रकटीकरण मात्र है। जिसने योग के माध्यम से इस अस्तित्व के एकत्व का अनुभव कर लिया है उसे योगी कहा जाता है, योगी पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त कर मुक्तावस्था को प्राप्त करता है। इसे मुक्ति, निर्वाण, कैवल्य या मोक्ष कहा जाता है ।
उद्देश्य:
योग के माध्यम से मनुष्य शरीर एवं मन के बीच सामंजस्य स्थापित कर आत्म साक्षात्कार करता है। योग अभ्यास (साधना) का उद्देश्य सभी त्रिविध प्रकार के दुखों से निवृत्ति प्राप्त करना है, जिससे प्रत्येक व्यक्ति जीवन में पूर्ण स्वतंत्रता तथा स्वास्थ्य, प्रसन्नता एवं सामंजस्य का अनुभव कर सके।
योग सही तरह से जीने का विज्ञान है और इसलिए इसे दैनिक जीवन में शामिल किया जाना चाहिए। यह व्यक्ति के सभी पहलुओं पर काम करता है जैसे: शारीरिक (भौतिक), मानसिक, भावनात्मक, आत्मिक और आध्यात्मिक।
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योग विस्मरण में दफन एक प्राचीन मिथक नहीं है। यह वर्तमान की सबसे बहुमूल्य विरासत है। यह आज की आवश्यकता है, और कल की संस्कृति।"
- स्वामी सत्यानंद सरस्वती
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